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हाथरस हादसा: प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही ने ली 121 लोगों की जान, भगदड़ के ये दो सबसे बड़े कारण हैं।

हाथरस हादसा: प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही ने ली 121 लोगों की जान, भगदड़ के ये दो सबसे बड़े कारण हैं।

हाथरस हादसा: प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही ने ली 121 लोगों की जान, भगदड़ के ये दो सबसे बड़े कारण हैं।

 

हाथरस हादसा: अधिकांश गवाहों ने कहा कि भगदड़ में 121 मौतों का कारण बाबा के चरणों की धूल पाने का विरोध और सेवादारों व सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही थी।

सत्संग हादसे की जांच के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज बृजेश कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में गठित न्यायिक जांच आयोग के समक्ष रविवार को चार घंटे में 34 प्रत्यक्षदर्शियों ने अपने बयान दर्ज कराए। अधिकांश गवाहों ने कहा कि भगदड़ में 121 मौतों का कारण बाबा के चरणों की धूल पाने की होड़ और सेवादारों व सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही थी।

सिकंदराराऊ के ब्रजबिहारी कौशिक ने कहा कि भगदड़ की घटना के दौरान वह मौके पर ही मौजूद थे। सत्संग समाप्त होने के बाद जब बाबा मंच से जाने लगे तो भीड़ उनके पीछे-पीछे चलने लगी। इस दौरान भगदड़ मच गई। जब हमने भीड़ को ऐसा करने से रोकने और लोगों को भगदड़ से बचाने का प्रयास किया तो वहां तैनात बाबा के सुरक्षाकर्मियों ने हमें आगे नहीं बढ़ने दिया और रोक दिया।

कौशल प्रताप सिंह और ओमवीर सिंह राणा ने बताया कि बाबा के पैर छूने और पौधे लूटने के विरोध के चलते भीड़ बेकाबू हो गई और वहां भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। यही घटना का कारण बनी। वहीं, दूसरे आरोपी राम प्रकाश शाक्य को रविवार को पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया। रिमांड मजिस्ट्रेट ने उसे चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

इससे पहले घटना के मुख्य आरोपी देव प्रकाश मधुकर और दूसरे आरोपी संजू यादव को शनिवार को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। अंधभक्ति का एक और ऑडियो…कयामत पहले ही तय थी…बाबा ने कहा था सोशल मीडिया पर एक और ऑडियो वायरल हो रहा है जिसमें बाबा के दो भक्त मोबाइल पर एक दूसरे से बात कर रहे हैं। यह उनके मौखिक आदान-प्रदान की रिकॉर्डिंग है जिसमें एक भक्त यह घोषणा कर रहा है कि यह प्रलय का दिन पहले से ही निर्धारित था।

बाबा ने पहले ही कह दिया था। यह भी कोई बड़ी बात नहीं है। वे सभी निराकार तक पहुँच चुके हैं। किसी भी दिन बाबा उन्हें फिर से मुक्ति दिला सकते हैं। यह अंधभक्ति को दर्शाता है।

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